कामख्या मंदिर : The Kamakhya Temple

 कामख्या मंदिर, कामाख्या देवी का मंदिर कहां स्थित है।

कामाख्या मंदिर, जिसे कामरूप-कामाख्या मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, देवी कामाख्या को समर्पित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है।


कामाख्या देवी


 यह असम राज्य में गुवाहाटी शहर के पास स्थित है। यह मंदिर तांत्रिक परंपरा से जुड़ा हुआ है और इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करता है, और यह योनि पूजा के अनुष्ठान के लिए जाना जाता है। यह मंदिर नीलाचल पहाड़ी पर स्थित है। कामाख्या मंदिर रहस्य से घिरा हुआ है और भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह मंदिर तांत्रिक और अघोरी परंपराओं के साथ अपने जुड़ाव के लिए जाना जाता है।

कामाख्या देवी का मंदिर कब स्थित हुआ है।

कामाख्या मंदिर कब स्थित हुआ है का कोई निश्चित इतिहासिक तिथि नहीं है, लेकिन यह मान्यता है कि यह मंदिर बहुत प्राचीन है और इसका इतिहास बहुत पुराना है। इस मंदिर का इतिहास तांत्रिक और अघोरी परंपराओं से जुड़ा हुआ है और यह 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है इसमें ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित है और यहां पर वार्षिक अम्बुबाची मेला भी आयोजित होता है

अंबूवाची मेला 

आपको बता दें कि हर साल 22 से 26 जून तक कामाख्या देवी मंदिर में अंबूवाची मेला का आयोजन होता है। इस दौरान कामाख्या मंदिर का कपाट 3 दिनों के लिए बंद रहता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस समय मां कामाख्या रजस्वला (मासिक धर्म) में रहती हैं। इस समय ब्रह्मपुत्र नदी का जल भी लाल हो जाता है। अंबूवाची पर्व के दौरान मंदिर के गर्भ गृह में पूजा-अर्जना बंद रहती है। 'अंबुबाची मेला' को तांत्रिक उत्सव के रूप में भी जाना जाता है। मां की पूजा करने के लिए देश भर के तान्त्रिक और तंत्र साधक भारी संख्या में यहां एकत्रित होते हैं।

कामाख्या देवी मंदिर के बारे में ।

कामाख्या देवी मंदिर सबसे शक्तिशाली पीठों में से एक माना जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यहां देवी सती की योनि गिरी थी। मालूम हो कि यहां देवी की कोई मूर्ति नहीं है बल्कि कुंड है, जिसे हमेशा फूलों से ढककर रखा जाता है। इस मंदिर में माता की योनि की पूजा की जाती है। अंबूवाची उत्सव के दौरान जब माता रानी का मासिक धर्म होता है तब उस कुंड को सफेद कपड़े से ढक दिया जाता है। तीन दिन बाद जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं तो सफेद कपड़ा लाल रंग का हो जाता है जिसे अंबूवाची वस्त्र कहा जाता है फिर इस वस्त्र को भक्तों को प्रसाद स्वरूप दिया जाता है। कामाख्या मंदिर असम की राजधानी गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर नीलाचल पर्वत पर स्थित है। सड़क, फ्लाइट या रेलमार्ग से गुवाहाटी पहुंचकर आसानी से कामाख्या माता मंदिर पहुंचा जा सकता है।

कामाख्या देवी


कामाख्या देवी मंदिर से जुड़ी खास बातें ।

** अंबूवाची मेला में मां कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र का उत्सव मनाया जाता है।

** इस समय 3 दिनों के लिए देवी का कपाट बंद कर दिया जाता है।

** इन दिनों पवित्र ग्रंथ पढ़ना, पूजा करना और खाना बनाने जैसी चीजों पर प्रतिबंध रहता है।

** इन तीन दिनों के बाद जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तब भक्तों को मां के दर्शन करने की अनुमति होती है।

**इस अंबुबाची मेले में दूर-दूर से तांत्रिक और लोग जुटते हैं।

कामाख्या मंदिर कब जाना चाहिए – जाने इतिहास, महत्व और पूजा विधि ।

Kamakhya Mandir का दौरा कब करना चाहिए,
 Kamakhya Devi Mandir Ki Puja Vidhi,


 कामाख्या मंदिर, जो कि Guwahati शहर में स्थित है, एक प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है। यहां लाखों भक्तगण आकर माँ कामाख्या देवी की पूजा करने और उनके दर्शन करने के लिए आते हैं। इसे देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग प्रतिवर्ष यात्रा करते हैं ताकि वे माँ कामाख्या के आशीर्वाद से लाभान्वित हो सकें।

माना जाता है कि वे भक्त जो माँ कामाख्या के प्रति श्रद्धा भाव से दर्शन करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस Mandir का एक विशेषता यह है कि यहां तांत्रिक पूजा भी होती है। इस क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर तांत्रिक विधाओं का पालन करने वाले दर्शकों को देखा जा सकता है।

मित्रों, आज हम इस लेख के माध्यम से आपको बताएंगे कि कामाख्या मंदिर कब जाना चाहिए। इसके अलावा, हम इस विषय से संबंधित और भी जानकारी प्रदान करेंगे। इसलिए, इस सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए कृपया हमारे इस लेख को आखिर तक ज़रूर पढ़ें। चलिए, हम आपको इस विषय में संपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

जानिए कामाख्या मंदिर कब जाना चाहिए।

यदि आप कामाख्या मंदिर पूजा या घूमने जाना चाहते हैं, तो आप साल भर में कभी भी , किसी भी समय कामाख्या मंदिर की यात्रा कर सकते हैं। यह मंदिर पूरे वर्ष खुला रहता है। अम्बुबाची मेले के दौरान, तीन दिनों के लिए कामाख्या मंदिर बंद रहता है। इसे माना जाता है कि इन दिनों में माँ कामाख्या मासिक धर्म से गुजरती हैं, इसलिए मंदिर को इन कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया जाता है।

कामाख्या देवी


उसके बाद, चौथे दिन मंदिर का दरवाजा खोला जाता है और देवी की पूजा अर्चना की जाती है। इसलिए, यदि आप चाहें, तो अम्बुबाची मेले के समय भी कामाख्या मंदिर जा सकते हैं

इसके अलावा, अगर आप अक्टूबर से मार्च महीने के बीच कामाख्या मंदिर यात्रा करते हैं, तो यह आपके लिए फायदेमंद होगा। क्योंकि इन दिनों, गुवाहाटी में मौसम ठंडा रहता है और अधिक गर्मी भी नहीं होती है। इसलिए, इस समय में आप सुहाने मौसम में कामाख्या मंदिर जा सकते हैं। कामाख्या मंदिर की यात्रा के लिए यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है

कामाख्या देवी मंदिर का महत्व।


कामाख्या मंदिर, माँ के 51 सर्वप्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। जब भगवान् श्री विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े किए थे, तो इन्हीं 51 टुकड़ों को शक्तिपीठ कहा गया। गुवाहाटी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामाख्या मंदिर में ही सती का योनि भाग गिरा था, जिसके कारण कामाख्या मंदिर में देवी सती के योनि की पूजा-अर्चना सदियों से चली आ रही है। यहाँ देवी की कोई मूर्ति या प्रतिमा नहीं है, बल्कि एक योनि आकार का शिलाखंड है।


माता कामाख्या देवी मंदिर का इतिहास।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती ने भगवान शंकर से विवाह किया था, परंतु इस vivah से माता सती के पिताजी अत्यधिक क्रोधित थे और उसके खिलाफ थे। इनका नाम दक्ष था, जिन्हें हिमायल के राजा के रूप में भी जाना जाता था। एक बार दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया था, और इस यज्ञ में माता सती और भगवान शंकर को आमंत्रित नहीं किया गया था। फिर भी , माता सती बिना आमंत्रण के ही उस यज्ञ में पहुँच गयी । जहाँ उन्हें अपने पिता के द्वारा किए गए भगवान शिव के अपमान को सहना पड़ा था । जिसके बाद माता सती ने अपमान को बर्दास्त नहीं किया और यज्ञ में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। इसके पश्चात्, शंकर भगवान को इस घटना का पता चला, और वह अत्यंत ही क्रोधित हो गए और माता सती की शरीर को अपने हाथों में उठाकर तांडव नृत्य करने लगे। इस दृश्य को देख भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती की देह को कई टुकड़ों में काट दिया ताकि भगवान शंकर का क्रोध शांत हो सके। माता सती के ये अंग धरती पर अलग-अलग जगह पर गिरे थे।

माता कामाख्या देवी मंदिर पूजा विधि।

कामाख्या देवी की पूजा से हमें कई लाभ प्राप्त होते हैं। आप या तो कामाख्या देवी मंदिर जाकर या अपने घर पर भी कामाख्या देवी की पूजा कर सकते हैं। यदि आप कामाख्या देवी मंदिर जाकर पूजा करते हैं, तो आपको सच्चे मन से धूप, दीप, आदि जलाकर कामाख्या देवी की पूजा करनी चाहिए। पूजा के बाद आपको कामाख्या देवी को पुष्प, आदि अर्पित करने चाहिए।

यदि आप अपने घर में ही कामाख्या देवी की पूजा करते हैं, तो नीचे दी गई निम्न विधि के अनुसार पूजा कर सकते हैं।

** माँ कामाख्या देवी की पूजा के लिए सबसे पहले आपको कामाख्या देवी की एक मूर्ति प्राप्त करनी है। ** उसके बाद, मूर्ति को साफ-सुथरी चौकी पर स्थापित करना है। ** उसके पश्चात, धूप, दीप, और पुष्पादि से कामाख्या देवी की पूजा करनी है। ** पूजा के समाप्ति होने के बाद, आप अपनी मर्जी के अनुसार कन्याओं को अपने घर आमंत्रित करके उनका पूजन करना है। ** कन्याओं के पूजन के बाद, उन्हें भोजन कराना और उन्हें कपड़े आदि का दान करना होता है । ** आप चाहे तो इच्छनुसार कामाख्या देवी की पूजा के बाद भंडारे का भी आयोजन कर सकते हैं। ** माँ कामाख्या देवी की पूजा और अर्चना के बाद, आप माता के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

कामाख्या देवी

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माँ कामाख्या देवी पूजा के लाभ ।

यदि आप माँ कामाख्या देवी की पूजा अर्चना करते हैं, तो आपको नीचे वर्णित लाभ प्राप्त होता है। ** माँ कामाख्या देवी की सच्चे मन से पूजा अर्चना करने से धन से जुड़ी सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। ** अगर आपके जीवन में विवाह सम्बन्धित जुड़ी बाधा उत्पन्न हो रही है , और विवाह में अडचनें आ रही हैं, तो ऐसे में आपको माँ कामाख्या देवी की पूजा करनी चाहिए। इससे आपके विवाह में आ रही सभी बाधा दूर होती है। **माँ कामाख्या देवी की पूजा करने से लंबे समय से चल रहे कानूनी विवादों का अंत होता है और हमें जीत की प्राप्ति होती है। **माँ कामाख्या देवी की पूजा अर्चना करने से हमारा स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। **माँ कामाख्या देवी की पूजा करने से व्यापार और नौकरी से जुड़ी परेशानियाँ भी दूर होती हैं और इससे हमारे व्यापार में वृद्धि होती है।

निष्कर्ष ।

मित्रों, आज हमने इस लेख के माध्यम से आपको बताया है कि कामाख्या मंदिर कब जाना चाहिए। इसके अलावा, हमने इस विषय से जुड़ी और भी जानकारी प्रदान की है। हम उम्मीद करते हैं कि आज का हमारा लेख आपके लिए उपयोगी सिद्ध हुआ होगा। यदि यह आपके काम आया है, तो कृपया इसे आगे साझा करें, ताकि अन्य लोग भी इस महत्वपूर्ण जानकारी से लाभान्वित हो सकें।

FAQs

कामाख्या देवी मंदिर क्यों मशहूर है?

51 शक्तिपीठों में शामिल कामख्या देवी का मंदिर तंत्र-मंत्र के क्षेत्र में पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यह स्थान अघोरियों की साधना और तंत्र-मंत्र साधना का एक तरह से महत्वपूर्ण माना जाता है।

Kamakhya Mandir कब जाना चाहिए?

माँ कामख्या मंदिर की यात्रा के लिए वर्ष में कभी भी ,किसी भी दिन को शुभ माना जा सकता है, लेकिन अगर आप देवी माँ का आशीर्वाद शीघ्र प्राप्त करना चाहते हैं, तो यहाँ नवरात्रि के समय में जाएं। बता दें कि देवी सती के योनि रूप की पूजा की जाती है, इसलिए यहाँ महिलाएं अपने मासिक धर्म के दौरान भी जा सकती हैं।

Kamakhya का अर्थ क्या है?

कामाख्या को अक्सर तंत्र-मंत्र से जोड़कर देखा जाता है। यह देवी दुर्गा के प्रसिद्ध नामों में से एक है। कामाख्या का सबसे प्रत्यक्ष रूप देवी काली या त्रिपुर सुंदरी है।

स्टेशन से माँ कामाख्या मंदिर तक की दूरी ।

गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से इस मंदिर की दूरी लगभग 8 किलोमीटर है।

माँ कामाख्या मंदिर में किस देवी की पूजा होती है ?

गुवाहाटी के निकट स्थित इस मंदिर में देवी सती के योनि भाग की पूजा की जाती है। क्योंकि यहाँ पर उनके शरीर के टुकड़े होते समय योनि का भाग गिरा था। इस स्थान पर देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक योनि रूपी शिलाखंड स्थापित है।

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